देश मजबुत तभी होगा जब हम मजबूत होंगे।

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आज मै देख रहा हू, हर कोई जाती- मजहब मे उलझता जा रहा। ना जाने कितने संघठन चल रहे है जोकि किसी ना किसी जाती- मजहब को समर्पित है।

सवाल ये है कि क्या ये संघठन जाती- मजहब मे भारतीयो को तोड रहे है या ये आपने समुदाय के लिये कुछ कर भी रहे है।
आज की समस्याओ को कोई संघठन अपने संकल्प पत्र मे क्यू नही लेकर आते।

क्या ये सिर्फ अपने समुदाय को अपने फायदे के लिये इस्तमाल कर रहे है या बाकई अपने समुदाय के लिये कुछ कार्य कर भी रहे है?

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  1. आज की मुख्य समस्या रोजगार है, कितने समुदाय रोजगार पे काम कर रहे है?

  2. हर समान्य बर्ग के समुदाय मे, कुछ परिबार आर्थिक रुप से असमर्थ होने की बजह से अपनी संतानो को उच्य शिक्षा नही दे पाते उनके लिये अपका संघठन क्या कर रहा है?

  3. कुछ परिबार जो आर्थिक रुप से आस्मर्थ उनकी सन्तानो की शादी मे आपके संघठन का क्या सहयोग रहता है?

अगर संघठन अपने समुदाय को सिर्फ वोट बैंक के नजरिये से देखते है तो ये गलत है। उनको आगे आकर आपने समुदाय के लिये कार्य करना चाहिये, और जाती- मजहब से ऊपर उडकर सबको साथ लेकर चलने की बात करनी चाहिये। देश मजबुत तभी होगा जब हम मजबूत होंगे।

जय हिन्द – जय भारत

सौरभ श्रीवस्तब